2026 में नाग पंचमी का पर्व सोमवार, 17 अगस्त को मनाया जाएगा। यह सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ रही है। सावन मास भगवान शिव का प्रिय मास माना जाता है और इस मास में शिव के गण नाग देवता की पूजा करने का विशेष विधान है। पंचमी तिथि 16 अगस्त 2026 को सायं 04 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी और 17 अगस्त 2026 को सायं 05 बजकर 00 मिनट पर समाप्त होगी।
नाग पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 05 बजकर 41 मिनट से 08 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 2 घंटे 43 मिनट होगी। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है और नाग देवता शिव के गण हैं, इसलिए इस वर्ष नाग पंचमी का पर्व अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है। सोमवार के दिन यह पर्व पड़ने से शिव-पार्वती और नाग देवताओं की संयुक्त कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
17 अगस्त 2026 को मनाई जाने वाली नाग पंचमी सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ रही है। सोमवार के दिन यह पर्व पड़ने से यह और भी अधिक शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इस दिन नाग देवताओं की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और राहु-केतु के दोषों का निवारण होता है।
नाग पंचमी का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व क्या है?
हिंदू धर्म में नाग पंचमी के पर्व का अत्यंत विशेष महत्व है। सावन का महीना वर्षा ऋतु का होता है और इस माह में सांप भू गर्भ से निकलकर भू तल पर आ जाते हैं। नाग निकलकर किसी को भी आहत ना कर दें, इसलिए नाग पंचमी की पूजा अर्चना की जाती है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
शास्त्रों और पुराणों में बताया गया है कि पंचमी तिथि के स्वामी स्वयं नागदेव हैं। इन दिनों सांपों की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। नाग देवताओं की पूजा करने से कुंडली में मौजूद राहु और केतु से संबंधित दोषों से मुक्ति मिलती है और कालसर्प दोष की पूजा भी इस दिन करवाई जाती है।
पंचमी के दिन नाग देवताओं की पूजा करने से सभी तरह की रुकावटें दूर रहती हैं और मनुष्य को सांपों के भय से मुक्ति मिलती है। पुराणों में बताया गया है कि नाग देवता पाताल के स्वामी हैं, इसलिए नाग पंचमी या किसी भी अन्य पंचमी के दिन व्यक्ति को भूमि की खुदाई करने से बचना चाहिए।
नाग पंचमी का पर्व हिंदू धर्म में सांपों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। भगवान शिव अपने गले में वासुकि नाग को धारण करते हैं। भगवान विष्णु अनंत शेषनाग पर शयन करते हैं। भगवान गणेश ने अपने पेट के चारों ओर सर्प को यज्ञोपवीत के रूप में धारण किया है। भगवान कृष्ण ने अपने बाल्यकाल में यमुना नदी में कालिया नाग को वश में किया था।
नाग पंचमी पर पूजे जाने वाले आठ नाग देवता कौन-कौन से है?
नाग पंचमी पर मुख्य रूप से आठ नाग देवताओं की पूजा की जाती है।
इन नाग देवताओं के नाम हैं वासुकि, ऐरावत, मणिभद्र, कालिया, धनंजय, तक्षक, कर्कोटकस्य और धृतराष्ट्र। इनकी पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और सर्प भय से मुक्ति मिलती है।
वासुकि नाग देवताओं का राजा माना जाता है और समुद्र मंथन के समय यह नाग मंदराचल पर्वत को घुमाने में सहायक था। ऐरावत इंद्र देव का वाहन है और इसे दिव्य नाग माना जाता है। मणिभद्र धन और समृद्धि का प्रतीक है। कालिया नाग को भगवान कृष्ण ने वश में किया था। धनंजय धन-धान्य का देने वाला नाग है। तक्षक वनों और जंगलों का स्वामी माना जाता है। कर्कोटकस्य रोगों से रक्षा करने वाला नाग है। धृतराष्ट्र पाताल लोक का संरक्षक माना जाता है।
इन आठ नाग देवताओं की पूजा करने से न केवल सर्प भय से मुक्ति मिलती है, बल्कि कुंडली में राहु-केतु और कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव भी कम होते हैं।
नाग पंचमी की पौराणिक कथा: जनमेजय और सर्पसत्र
पौराणिक कथा के अनुसार जनमेजय अर्जुन के पौत्र राजा परीक्षित के पुत्र थे।
जब जनमेजय ने पिता की मृत्यु का कारण सर्पदंश जाना तो उसने बदला लेने के लिए सर्पसत्र नामक यज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ में सभी नागों को आहुति में डालने का विधान था और यज्ञ की अग्नि की तीव्रता से समस्त नाग प्रजाति समाप्त होने की कगार पर थी। नागों की रक्षा के लिए ऋषि आस्तिक मुनि ने श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन यज्ञ को रोक दिया और नागों की रक्षा की।
आस्तिक मुनि के प्रभावशाली वचनों और तपस्या से जनमेजय ने सर्पसत्र समाप्त कर दिया। तक्षक नाग के बचने से नागों का वंश बच गया। आग के ताप से नाग को बचाने के लिए ऋषि ने उन पर कच्चा दूध डाल दिया था। तभी से नाग पंचमी मनाई जाने लगी और नाग देवता को दूध चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
इस कथा से यह संदेश मिलता है कि क्रोध और बदले की भावना से किए गए कार्य विनाशकारी हो सकते हैं। क्षमा, दया और सहिष्णुता ही सच्चा धर्म है। नाग पंचमी का पर्व इसी सहिष्णुता और समस्त प्राणियों के प्रति करुणा का प्रतीक है।
नाग पंचमी की पूजा विधि क्या होती है? जाने सम्पूर्ण विधि
पूजा से पहले की तैयारी
नाग पंचमी के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होना चाहिए। शुद्ध और साफ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो इस दिन व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और उसे गंगाजल से पवित्र करें। नाग देवताओं की मूर्ति, तस्वीर या चित्र तैयार रखें। आजकल नाग देवताओं की फोटो बाजारों में आसानी से मिल जाती है।
पूजा सामग्री
नाग पंचमी पूजन के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है। शुद्ध गाय का दूध जो नाग देवता को अत्यंत प्रिय है। हल्दी, कुमकुम, चंदन, अक्षत और फूल। धूप, दीपक और घी। बेलपत्र और नीले कमल के फूल। नाग देवता की मूर्ति या चित्र। खड़िया या गोबर से दीवार पर नाग देवता के चिह्न बनाने के लिए। पूजा के बाद प्रसाद के रूप में सेवई और चावल।
पूजा के चरण
- पहले चरण में सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर शिवालय में पूजा अर्चना करें और फिर व्रत का संकल्प लें।
- दूसरे चरण में घर के मुख्य द्वार, घर के मंदिर और रसोई के बाहर के दरवाजे के दोनों तरफ खड़िया से पुताई करें और कोयले से नाग देवताओं के चिन्ह बनाएं।
- तीसरे चरण में नाग देवता की मूर्ति या चित्र को लकड़ी के पटरे पर स्थापित करें। हल्दी, कुमकुम, चंदन, अक्षत और फूलों से पूजा करें।
- चौथे चरण में नाग देवता को दूध और जल से स्नान करवाएं। धूप, दीपक और नैवेद्य अर्पित करें।
- पांचवें चरण में सच्चे मन से नाग देवताओं का ध्यान करें और फिर आरती करें। आरती करने के बाद नाग पंचमी की कथा का पाठ भी करें।
- छठे चरण में घर के नाग देवताओं की पूजा करने के बाद खेतों या फिर ऐसे स्थान पर दूध का कटोरा रख दें जहां सांपों के आने की संभावना हो।
इससे नाग देवता प्रसन्न होते हैं और सर्प भय से मुक्ति मिलती है।
नाग पंचमी पर भोग
नाग पंचमी के दिन पूजा में सेवई और चावल बनाए जाते हैं। ये दोनों ही वस्तुएं नाग देवता को प्रिय मानी जाती हैं। पूजा के बाद इस भोग को प्रसाद के रूप में वितरित करना चाहिए। कुछ क्षेत्रों में नाग पंचमी के दिन कच्चे दूध से बनी मिठाइयाँ भी भोग के रूप में अर्पित की जाती हैं।
नाग पंचमी पर विशेष योग और शुभ संयोग कौन-से है?
17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी पर कई शुभ योग बन रहे हैं जो इस पर्व को और भी महत्वपूर्ण बना रहे हैं। सोमवार के दिन यह पर्व पड़ने से सोमवार व्रत और नाग पंचमी का संयुक्त फल प्राप्त होगा। इस दिन शुक्रादित्य योग और शोभन योग का शुभ संयोग भी रहेगा।
शुक्रादित्य योग सौंदर्य, समृद्धि और कला के क्षेत्र में सफलता का संकेत देता है। शोभन योग शुभ कार्यों के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है। इन योगों के संयोग से नाग पंचमी की पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
सावन मास के शुक्ल पक्ष में यह पर्व पड़ने से भगवान शिव और नाग देवताओं की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है। इस दिन शिवलिंग पर दूध और बेलपत्र अर्पित करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
नाग पंचमी के उपाय और व्रत विधि क्या है?
व्रत विधि
नाग पंचमी के दिन व्रत रखने वाले भक्तों को प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए। चतुर्थी के दिन एक समय भोजन करें और पंचमी के दिन उपवास रखें। पंचमी के दिन पूजा समाप्त होने के बाद ही भोजन करना चाहिए। व्रत में सात्विक भोजन का सेवन करें और तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडे, प्याज और लहसुन का पूर्णतः त्याग करें।
राहु-केतु दोष निवारण उपाय
नाग पंचमी राहु-केतु और कालसर्प दोष निवारण के लिए सबसे शक्तिशाली दिन माना जाता है। इस दिन निम्नलिखित उपाय करने से राहु-केतु के दुष्प्रभाव कम होते हैं। नाग देवता के बीज मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः का 108 बार जाप करें। राहु काल में नाग देवता की पूजा करें और कच्चा दूध अर्पित करें।
कालसर्प दोष से पीड़ित जातकों को इस दिन त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग या श्री कालहस्ती मंदिर में रुद्राभिषेक कराना चाहिए। नाग पंचमी के दिन नीले कमल के फूल, बेलपत्र और कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने से कालसर्प दोष शांत होता है। जरूरतमंदों को नीले वस्त्र, तिल और उड़द की दाल का दान करें।
अन्य शुभ उपाय कौन-कौन से है?
- नाग पंचमी के दिन सर्पों को मारना अत्यंत अशुभ माना जाता है और इसे पाप कहा गया है।
- सर्पों का सम्मान करें और उन्हें अपने आवास से दूर जाने दें। नाग पंचमी के दिन भूमि की खुदाई करने से बचना चाहिए क्योंकि नाग देवता पाताल के स्वामी हैं और भूमि की खुदाई से उन्हें कष्ट हो सकता है।
- नाग पंचमी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें।
- गरीबों और जरूरतमंदों में अन्न और वस्त्र का दान करें। नाग देवता की कथा सुनें और उनके मंत्रों का जाप करें।
नाग पंचमी मंत्र और स्तोत्र
नाग पंचमी के दिन निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभदायक माना जाता है।
- नाग गायत्री मंत्र है ॐ नवकुलाय विद्महे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्। इस मंत्र का जाप करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है।
- नाग देवता का बीज मंत्र है ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः। इस मंत्र का नियमित जाप करने से राहु-केतु के दोष शांत होते हैं।
- नाग पंचमी का विशेष मंत्र है सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले। ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥ ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः। ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥
- नाग देवताओं के नौ नामों का स्मरण करने वाला मंत्र है अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्। शङ्ख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥ एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्। सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः। तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥
इस मंत्र का नियमित पाठ करने से विष भय नहीं रहता और जीवन में विजय प्राप्त होती है।
नाग पंचमी के प्रमुख मंदिर कौन-कौन से है?
- भारत में कई प्रसिद्ध नाग पंचमी मंदिर हैं जहाँ इस दिन विशेष पूजा और आयोजन होते हैं। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र में नाग पंचमी के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है। यहाँ कालसर्प दोष निवारण पूजा का विशेष महत्व है।
- श्री कालहस्तीश्वर मंदिर आंध्र प्रदेश में नाग पंचमी के दिन लाखों भक्तों की भीड़ जुटती है। इस मंदिर में राहु-केतु पूजा और कालसर्प दोष निवारण पूजा का विशेष महत्व है।
- महाराष्ट्र में नाग पंचमी के दिन बांबू के बवनों और चींटी के बिलों पर दूध चढ़ाने की परंपरा है।
- बंगाल और पूर्वोत्तर भारत में इस दिन मनसा देवी की पूजा का विशेष महत्व है।
- कर्नाटक और केरल में नाग मंदिरों और नाग प्रतिष्ठाओं पर हल्दी और कुमकुम लगाने की परंपरा है।
नाग पंचमी पर क्या करें और क्या न करें
करें
- नाग पंचमी के दिन प्रातःकाल स्नान करके नाग देवता की पूजा करें।
- शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र और नीले कमल के फूल अर्पित करें।
- नाग देवता के मंत्रों का जाप करें और उनकी कथा सुनें।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
- गरीबों और जरूरतमंदों में दान-पुण्य करें।
- सर्पों का सम्मान करें और उन्हें कष्ट न पहुँचाएं। भूमि की खुदाई से बचें।
न करें
- नाग पंचमी के दिन सर्पों को मारना अत्यंत अशुभ और पापपूर्ण माना जाता है।
- इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडे, प्याज और लहसुन का सेवन न करें। भूमि की खुदाई करने से बचें क्योंकि इससे नाग देवता को कष्ट हो सकता है।
- झूठ, कपट और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। दूसरों को धोखा देने या चोट पहुँचाने का प्रयास न करें।
नाग पंचमी का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। सर्प प्रकृति का अभिन्न अंग हैं और इनका संरक्षण हमारा कर्तव्य है। नाग पंचमी के दिन सर्पों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव रखें। नाग देवताओं की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।