वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का योग व्यक्ति के जीवन को गहराई से प्रभावित करता है। इनमें से मंगल और केतु की युति को सबसे संवेदनशील और विस्फोटक माना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जब साहस, ऊर्जा और अग्नि तत्व के प्रतीक मंगल देव का मिलन रहस्य, वैराग्य और छाया ग्रह केतु से होता है, तो ‘अंगारक दोष’ (जिसे कुछ ग्रंथों में पिशाच योग भी कहा जाता है) का जन्म होता है। यह योग जीवन में असाधारण ऊर्जा तो देता है, लेकिन अनियंत्रित होने पर मानसिक अशांति, आक्रामकता और कई भौतिक कष्टों का कारण बन जाता है।
होता है मंगल-केतु का अंगारक दोष?
मंगल हमारे शरीर में रक्त, पराक्रम, भूमि और अग्नि ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। दूसरी ओर, केतु बिना सिर का धड़, सूक्ष्म दृष्टि, अचानक होने वाली घटनाओं और शल्य चिकित्सा (Surgery) का प्रतीक है।
जब मंगल की तीव्र अग्नि के साथ केतु का धुआं और अनिश्चितता जुड़ती है, तो जातक की आंतरिक ऊर्जा दिशाहीन होकर भड़क उठती है। यही कारण है कि इस दोष से पीड़ित व्यक्ति के भीतर अचानक अत्यधिक क्रोध, आक्रामकता और बिना सोचे-समझे कठोर निर्णय लेने की प्रवृत्ति पनपने लगती है।
अंगारक दोष के मुख्य लक्षण एवं प्रभाव
यदि आपकी जन्मकुंडली में मंगल-केतु की युति पर शुभ ग्रहों का प्रभाव न हो, तो जीवन में निम्नलिखित समस्याएं स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगती हैं:
- अनियंत्रित क्रोध और मानसिक तनाव: व्यक्ति बात-बात पर अपना आपा खो बैठता है और बाद में पछताता है।
- दुर्घटनाएं और चोट: वाहन दुर्घटना, आग या बिजली से जलना और धारदार औजारों से चोट लगने का निरंतर भय बना रहता है।
- स्वास्थ्य संबंधी विकार: उच्च या निम्न रक्तचाप, रक्त संक्रमण, त्वचा रोग, और बार-बार सर्जरी (शल्य चिकित्सा) की नौबत आना।
- पारिवारिक व संपत्ति विवाद: भाई-बहनों के साथ संबंधों में खटास और पैतृक संपत्ति को लेकर अदालती उलझनें पैदा होना।
विभिन्न भावों में अंगारक दोष का प्रभाव
कुंडली के अलग-अलग घरों (भावों) में इस युति का असर अलग-अलग रूप में सामने आता है:
| भाव (House) | संभावित असर और लक्षण |
| प्रथम भाव (लग्न) | स्वभाव में अत्यधिक आक्रामकता, जिद्दीपन और सिर में चोट का भय। |
| चतुर्थ भाव | घरेलू क्लेश, मानसिक अशांति, माता के स्वास्थ्य में गिरावट और भूमि विवाद। |
| सप्तम भाव | वैवाहिक जीवन में भयानक तनाव, जीवनसाथी से अलगाव या वैचारिक मतभेद। |
| अष्टम भाव | अचानक दुर्घटना का योग, गुप्त रोग, शल्य चिकित्सा और स्वास्थ्य पर संकट। |
| दशम भाव | करियर में ऊंचा पद मिलने के बावजूद सहकर्मियों व अधिकारियों से अनबन। |
| भाव (House) | संभावित असर और लक्षण |
| प्रथम भाव (लग्न) | स्वभाव में अत्यधिक आक्रामकता, जिद्दीपन और सिर में चोट का भय। |
| चतुर्थ भाव | घरेलू क्लेश, मानसिक अशांति, माता के स्वास्थ्य में गिरावट और भूमि विवाद। |
| सप्तम भाव | वैवाहिक जीवन में भयानक तनाव, जीवनसाथी से अलगाव या वैचारिक मतभेद। |
| अष्टम भाव | अचानक दुर्घटना का योग, गुप्त रोग, शल्य चिकित्सा और स्वास्थ्य पर संकट। |
| दशम भाव | करियर में ऊंचा पद मिलने के बावजूद सहकर्मियों व अधिकारियों से अनबन। |
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