दीपावली 8 नवंबर 2026: महालक्ष्मी पूजा का मुहूर्त, पूजा विधि

8 नवंबर 2026 को एक विशेष अवसर है दीपावली रविवार के दिन यह पर्व पड़ रहा है। शाम 05 बजकर 55 मिनट से 07 बजकर 51 मिनट के बीच का वृषभ लग्न मुहूर्त लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वोत्तम रहेगा। इस वर्ष अमावस्या तिथि पूरे दिन रहेगी जिससे पूजा का समय और भी लचीला होगा।

दिवाली 2026: कार्तिक अमावस्या पर दीपोत्सव

दिवाली या दीपोत्सव हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। यह अंधकार पर प्रकाश की विजय और सुख-संपत्ति की प्रतीक मानी जाती है। वर्ष 2026 में दिवाली 8 नवंबर, रविवार को पड़ेगी। इसे पांच दिन तक धूमधाम से मनाया जाता है:

दिवाली पर्व धनतेरस (6 नवम्बर, शुक्र) से शुरू होता है, फिर छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी, 7 नवम्बर), मुख्य दिवाली (लक्ष्मी-गणेश पूजा, 8 नवम्बर) एवं गोवर्धन पूजा/अन्नकूट (9 नवम्बर) व भाई-दूज (10 नवम्बर) तक चलता है।

दीपावली 2026: तारीख और पंचांग विवरण

वर्ष 2026 में दीपावली का त्यौहार रविवार, 8 नवंबर को मनाया जाएगा। यह अक्टूबर के बजाय नवंबर में पड़ रही है। अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को प्रातः 11 बजकर 27 मिनट पर प्रारंभ होगी और 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार अमावस्या तिथि पूरे 8 नवंबर के दिन रहेगी। सूर्योदय प्रातः 06 बजकर 40 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 05 बजकर 41 मिनट पर होगा। वृषभ लग्न काल शाम 05 बजकर 55 मिनट से 07 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।

वर्ष 2026 में दिवाली तिथि एवं कार्यक्रम

दिन/उत्सवतारीख (वर्ष 2026)मुख्य अनुष्ठान एवं महत्त्व
धनतेरस6 नवम्बर, शुक्रवारधनतेरस (धनत्रयोदशी) पर धन-धन्वंतरि पूजन। धन-संपत्ति की देवी लक्ष्मी की आराधना।
नरक चतुर्दशी7 नवम्बर, शनिवारकृष्ण पक्ष चतुर्दशी: भगवान श्रीकृष्ण का नरकासुर वध, पूजा एवं दीप जलाना। दक्षिण भारत में मुख्य उत्सव।
दिवाली (मुख्य)8 नवम्बर, रविवारकार्तिक अमावस्या: लक्ष्मी-गणेश पूजा (प्रदोषकाल में)। बंगाल/ओड़िशा में महाकाली पूजा।
गोवर्धन पूजा/अन्नकूट9 नवम्बर, सोमवारदेवोत्थान अमावस्या (प्रतिपदा): गोवर्धन पूजा, नागपूजा; गुजरात में नववर्ष आरंभ, अन्नकूट उत्सव।
भाई-दूज10 नवम्बर, मंगलवारभैया-बीज या यम द्वितीया: बहन-भाई मिलन, भाई के लंबी आयु के लिए बहनें तिलक करती हैं।

लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त 2026

प्रदोष काल मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ

प्रदोष काल सायं 05 बजकर 31 मिनट से रात्रि 08 बजकर 08 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 2 घंटे 37 मिनट होगी। इसी काल में वृषभ लग्न जो एक स्थिर लग्न है शाम 05 बजकर 55 मिनट से 07 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 1 घंटे 56 मिनट होगी। लक्ष्मी पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त प्रदोष काल में वृषभ लग्न के दौरान अर्थात शाम 05 बजकर 55 मिनट से 07 बजकर 51 मिनट के बीच रहेगा।

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में स्थिर लग्न वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ होने पर लक्ष्मी पूजन करना सर्वोत्तम माना जाता है। इस समय पूजा करने से माता लक्ष्मी अंश रूप में घर में ठहर जाती हैं और स्थायी समृद्धि प्रदान करती हैं।

महानिशीथ काल मुहूर्त

महानिशीथ काल रात्रि 11 बजकर 38 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 1 घंटे 52 मिनट होगी। इस काल में सिंह लग्न रात्रि 12 बजकर 27 मिनट से 02 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। यह मुहूर्त मुख्य रूप से तांत्रिक पद्धति से पूजा करने वाले पंडितों और विशेष साधकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

दीपावली 2026 पांच दिवसीय त्यौहार कौन-कौन से और कब है?

दीपावली का त्योहार पांच दिनों तक चलता है जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है।

  • धनतेरस 6 नवंबर शुक्रवार को मनाया जाएगा जिसमें धन-धान्य की देवी लक्ष्मी की आराधना की जाती है और सोना-चांदी खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • नरक चतुर्दशी जिसे छोटी दीवाली भी कहा जाता है 7 नवंबर शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान कृष्ण का नरकासुर पर विजय और पापों से मुक्ति का उत्सव मनाया जाता है।
  • मुख्य दीपावली 8 नवंबर रविवार को होगी जिसमें महालक्ष्मी, भगवान गणेश और देवी सरस्वती का पूजन किया जाएगा।
  • गोवर्धन पूजा या अन्नकूट 9 नवंबर सोमवार को मनाया जाएगा जो भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की लीला का स्मरण कराता है।
  • अंत में भैया दूज 10 नवंबर मंगलवार को मनाई जाएगी जो भाई-बहन के पवित्र प्रेम का त्योहार है।

लक्ष्मी जी की पूजा विधि क्या है? कैसे करें दीपावली पर लक्ष्मी पूजा?

पूजा से पहले की तैयारी

पूजा शुरू करने से पहले पूरे घर की गहरी सफाई करना अनिवार्य है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी केवल स्वच्छ और व्यवस्थित घर में ही प्रवेश करती हैं। घर के सभी कोनों में गंगाजल छिड़ककर वातावरण को पवित्र करें। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और दीयों की श्रृंखला लगाएं जो माता लक्ष्मी का आह्वान करती है। पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर पूजा की चौकी तैयार करें।

पूजा सामग्री

लक्ष्मी पूजा के लिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चित्र मुख्य देवता के रूप में आवश्यक हैं। जल से भरा कलश समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कमल के फूल माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं। हल्दी, कुमकुम और अक्षत अर्थात चावल तिलक और आहुति के लिए उपयोग किए जाते हैं। घी या तेल से भरा दीपक प्रकाश का प्रतीक है। मिठाई और फल भोग के रूप में अर्पित किए जाते हैं। सिक्के और धन धन-वैभव का आह्वान करते हैं। अबीर-गुलाल उत्सव का प्रतीक है।

पूजा के चरण

  • सबसे पहले पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाएं। इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर भी दीये जलाएं।
  • माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, देवी सरस्वती, भगवान विष्णु और कुबेर देव का आह्वान करें।
  • मूर्ति पर हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाएं। फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।
  • लक्ष्मी मंत्रों का जाप करें। मुख्य मंत्र है ओम श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांकं दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ओम।
  • माता लक्ष्मी की आरती करें और प्रसाद बांटें।
  • व्यापारिक पूजन करें जिसमें तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरणों की पूजा की जाती है। यह विशेष रूप से गुजराती समुदाय में चोपड़ा पूजन के नाम से प्रसिद्ध है।

दीपावली 2026 का ज्योतिषीय महत्व क्या है?

8 नवंबर 2026 को रविवार होने से दिन सूर्यवार का है। कार्तिक मास की अमावस्या सभी अमावस्याओं में सबसे शक्तिशाली मानी जाती है। प्रदोष काल अर्थात सूर्यास्त के बाद का समय लक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम काल माना जाता है। वृषभ लग्न में पूजन करने से स्थायी समृद्धि प्राप्त होती है।

इस वर्ष दीपावली पर धन, कर्म, भाग्य और पुरुषार्थ की ऊर्जाएं अपने चरम पर होंगी। इनके विशेष संयोग से इनका प्रभाव और भी अधिक शक्तिशाली माना जाएगा। सूर्य और चंद्रमा की विशिष्ट स्थिति इस दिन को अत्यंत फलदायी बनाएगी।

धनतेरस से दीपावली धन-वैभव के उपाय कौन-कौन से है?

धनतेरस 6 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन संध्या में यमराज की पूजा के लिए यम दीपक जलाना चाहिए। आरोग्य के देवता धन्वंतरि की आराधना की जाती है। धनतेरस को धातु खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। दीपावली पर कुबेर यंत्र स्थापित करने से धन में वृद्धि होती है। श्रीयंत्र की स्थापना भी समृद्धि लाती है। प्रतिदिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना चाहिए। जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न और दक्षिणा देना दान-पुण्य का महत्वपूर्ण भाग है।

दीपावली 2026 8 नवंबर को एक विशेष अवसर है जब रविवार के दिन यह पर्व पड़ रहा है। शाम 05 बजकर 55 मिनट से 07 बजकर 51 मिनट के बीच का वृषभ लग्न मुहूर्त लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वोत्तम रहेगा। इस वर्ष अमावस्या तिथि पूरे दिन रहेगी जिससे पूजा का समय और भी लचीला होगा।

अपने घर को स्वच्छ रखें, दीयों से प्रकाशित करें और माता लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य, सुख-समृद्धि प्राप्त करें। शुभ दीपावली।

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