अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में कालसर्प दोष पूजा का महत्व

हिंदू पंचांग में अधिक मास अर्थात् पुरुषोत्तम मास को अत्यंत शुभ, दुर्लभ और फलदायी माना गया है। यह मास प्रत्येक तीन वर्षों में एक बार आता है और इसे भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम स्वरूप का मास कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इस माह को “मलमास” भी कहा जाता है, परंतु यह “मल” अर्थात् अपवित्रता से नहीं, अपितु इसकी विशेषता से है कि यह मास सभी पापों को धो देता है।

जब इस दिव्य मास की विशेषता कालसर्प दोष जैसे गंभीर ज्योतिषीय दोष के निवारण से जुड़ती है, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। अधिक मास में उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा कराना ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी उपाय माना जाता है।

अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) क्या होता है? इसकी क्या विशेषताएँ है?

हिंदू चंद्रमास में प्रत्येक वर्ष 12 महीने होते हैं, परंतु सौर वर्ष से चंद्र वर्ष में लगभग 11 दिनों का अंतर रह जाता है। यह अंतर तीन वर्षों में मिलकर एक माह के बराबर हो जाता है। इस अतिरिक्त माह को अधिक मास, मलमास, या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण:

  • यह मास चंद्र और सौर कैलेंडर के अंतर को संतुलित करता है
  • इस मास में सूर्य कोई भी राशि परिवर्तन नहीं करता (संक्रांति नहीं होती)
  • इसे भगवान विष्णु का प्रिय मास माना गया है
  • पुराणों में इस मास को “फलों का राजा” कहा गया है

अधिक मास की विशेषताएँ

विशेषताविवरण
दुर्लभता3 वर्ष में एक बार आता है
देवताभगवान पुरुषोत्तम (विष्णु)
मुख्य कर्मदान, जप, तप, पूजा, व्रत
फल प्राप्तिसामान्य माह की अपेक्षा 10-100 गुणा अधिक
पाप नाशसमस्त पापों का नाश करने वाला
ग्रह शांतिग्रह दोष निवारण के लिए सर्वोत्तम

कालसर्प दोष क्या है?

जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में स्थित हों, अर्थात् राहु और केतु की अक्ष में सभी ग्रह आ जाएँ, तो इस स्थिति को “कालसर्प दोष” कहा जाता है। यह एक गंभीर ज्योतिषीय दोष है जो व्यक्ति के जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में बाधा उत्पन्न करता है।

कालसर्प दोष के प्रकार कितने है?

ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प दोष को मुख्य रूप से 12 प्रकार में बाँटा गया है:

क्रमदोष का नामराहु की स्थितिमुख्य प्रभाव
1अनंत कालसर्प दोष1st House (लग्न)स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास में कमी
2कुलिक कालसर्प दोष2nd Houseधन-हानि, कुटुंब में कलह, वाणी में कठोरता
3वासuki कालसर्प दोष3rd Houseसाहस में कमी, भाई-बहन से मतभेद, पराक्रम हानि
4शंखपाल कालसर्प दोष4th Houseमाता के स्वास्थ्य, वाहन, भूमि सुख में बाधा
5पद्म कालसर्प दोष5th Houseसंतान, बुद्धि, शिक्षा, प्रेम में विलंब
6महापद्म कालसर्प दोष6th Houseरोग, शत्रु, ऋण, मानसिक तनाव
7तक्षक कालसर्प दोष7th Houseविवाह में विलंब, दांपत्य कलह, व्यापारिक हानि
8कर्कोटक कालसर्प दोष8th Houseआयु, अकाल मृत्यु भय, अप्रत्याशित घटनाएँ
9शंखचूड़ कालसर्प दोष9th Houseभाग्यहीनता, पिता से मतभेद, धर्म-कर्म में बाधा
10घातक कालसर्प दोष10th Houseकरियर में असफलता, नौकरी में बाधा, कर्म क्षेत्र
11विषधर कालसर्प दोष11th Houseआय में बाधा, मित्रों से धोखा, लाभ में कमी
12शेषनाग कालसर्प दोष12th Houseव्यय, विदेश यात्रा में बाधा, मोक्ष में विलंब

कालसर्प दोष के लक्षण

यदि कुंडली में कालसर्प दोष हो, तो व्यक्ति को निम्नलिखित समस्याएँ हो सकती हैं:

  • मानसिक: अवसाद, चिंता, अनिद्रा, भय, आत्महत्या के विचार
  • शारीरिक: दीर्घकालिक रोग, त्वचा रोग, पेट संबंधी समस्याएँ
  • व्यावसायिक: करियर में असफलता, व्यापार में घाटा, नौकरी में स्थानांतरण या बर्खास्तगी
  • पारिवारिक: कुटुंब में कलह, विवाह में विलंब या टूटना, संतान में बाधा
  • आर्थिक: अनावश्यक धन-व्यय, ऋण में डूबना, धन आने में बाधा
  • आध्यात्मिक: पूजा में मन नहीं लगना, गुरुओं से मतभेद

अधिक मास में कालसर्प दोष पूजा क्यों करानी चाहिए?

1. दुर्लभ अवसर का लाभ

अधिक मास 3 वर्ष में एक बार आता है। ऐसे में कालसर्प दोष पूजा का यह अवसर अत्यंत दुर्लभ है। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि अधिक मास में किया गया कोई भी धार्मिक अनुष्ठान सामान्य माह की अपेक्षा 10 गुणा अधिक फलदायी होता है।

2. पुरुषोत्तम मास की विशेष कृपा

भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम स्वरूप की कृपा से इस माह में समस्त ग्रह शांत हो जाते हैं। राहु और केतु जो कि छाया ग्रह हैं और सबसे अधिक पीड़ा देते हैं, उनकी शांति के लिए भगवान विष्णु की उपासना सर्वोत्तम मानी जाती है। अधिक मास में विष्णु पूजा के साथ कालसर्प दोष निवारण अनुष्ठान कराने से राहु-केतु की पीड़ा शीघ्र समाप्त होती है।

3. पितृ दोष का भी निवारण

कालसर्प दोष अक्सर पितृ दोष से भी जुड़ा होता है। अधिक मास में पितृ तर्पण और दान करने से पितृ दोष भी शांत होता है। इस प्रकार यह पूजा दोहरा लाभ देती है।

4. ग्रहण युक्त अधिक मास

यदि अधिक मास में सूर्य या चंद्र ग्रहण भी पड़े, तो इस पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। ग्रहण काल में मंत्र जप और हवन का फल अत्यधिक होता है।

5. शास्त्रीय मान्यता

पद्म पुराण में वर्णित है कि अधिक मास में किए गए दान, जप और तप का फल अक्षय होता है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि इस मास में भगवान विष्णु की पूजा से समस्त ग्रह दोष नष्ट हो जाते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण में अधिक मास को “मोक्षदायी” कहा गया है।

अधिक मास में कालसर्प दोष पूजा की विधि क्या है?

आवश्यक सामग्री

कालसर्प दोष पूजा एक शास्त्रोक्त अनुष्ठान है जो अनुभवी ब्राह्मणों द्वारा ही किया जाना चाहिए। आवश्यक सामग्री इस प्रकार है:

मुख्य सामग्री:

  • कालसर्प यंत्र (स्वर्ण/रजत/ताम्र)
  • राहु-केतु की प्रतिमा या मूर्ति
  • नाग देवता की मूर्ति या फोटो
  • शिवलिंग (पार्थिव शिवलिंग अथवा धातु का)
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • गंगाजल, तुलसी जल
  • काले तिल, काले वस्त्र
  • नारियल (3 या 7)
  • कुशा, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग (शिव के लिए)
  • रुद्राक्ष माला
  • काले धागे की कलावा
  • नाग पंचमी या शिवरात्रि की विशेष सामग्री

पूजा की चरणबद्ध विधि

संकल्प और मंत्रोच्चार

ब्राह्मण जी के साथ प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर संकल्प लें। अपना नाम, गोत्र, राशि, नक्षत्र, जन्म तिथि और समय बोलकर कालसर्प दोष निवारण हेतु संकल्प करें।

कालसर्प यंत्र स्थापना

कालसर्प यंत्र को पंचामृत से स्नान कराकर लाल वस्त्र पर स्थापित करें। यंत्र पर कुमकुम, अक्षत, फूल चढ़ाएँ।

नाग देवता पूजन

नाग देवता की पूजा करें। नाग मंत्रों का जप करें:

ॐ नमः शिवायॐ नागदेवता नमःॐ कुरु कुल्ये नमःॐ सर्पराजाय नमः

राहु-केतु पूजन

राहु और केतु की अलग-अलग पूजा करें। राहु के लिए काले वस्त्र, काले तिल, उड़द और केतु के लिए धतूरा, बहुवार (बहुवारा) का प्रयोग करें।

राहु मंत्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (18000 बार जप)

केतु मंत्र: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः (18000 बार जप)

शिव पूजन और रुद्राभिषेक

कालसर्प दोष के प्रमुख देवता भगवान शिव हैं। शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करें। रुद्राष्टाध्यायी, लघु रुद्र, या महारुद्र का पाठ करना अत्यंत लाभदायक है।

महामृत्युंजय मंत्र जप:

ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||

कालसर्प दोष निवारण मंत्र जप

मुख्य मंत्र:

ॐ कालसर्प दोष निवारणाय नमः

या फिर विशिष्ट मंत्र:

ॐ ह्स्त पूर्वक (अपने गोत्र) गोत्र (अपना नाम) नामनः कालसर्प दोष निवारणार्थं सर्वदोष शांतये राहु-केतु प्रसादार्थं जपे विनियोगः

हवन (यज्ञ)

हवन कुंड में अग्नि स्थापित करके राहु-केतु और नाग देवता की आहुतियाँ दें।

  • सामग्री: काले तिल, घी, समिधा (पलाश, खैर, बेल), नारियल की गरी, काले उड़द
  • संख्या: कम से कम 108 आहुतियाँ, यदि संभव हो तो 1008 आहुतियाँ
  • मंत्र: राहु-केतु कालसर्प मंत्रों से आहुतियाँ

पूर्णाहुति और ब्राह्मण भोज

हवन के बाद पूर्णाहुति दें। नारियल, काले वस्त्र, दक्षिणा और भोजन सामग्री ब्राह्मणों को दान करें। कम से कम 2, 5, 7 या 11 ब्राह्मणों का भोजन कराएँ।

नाग प्रतिमा विसर्जन

यदि नाग की मिट्टी की प्रतिमा बनाई गई हो, तो उसे नदी या पोखर में विसर्जित करें। राहु-केतु की मूर्ति को मंदिर में स्थापित कर दें।

अधिक मास में विशेष उपाय कौन-कौन से है?

कालसर्प दोष पूजा के साथ-साथ निम्नलिखित उपाय करने से लाभ अधिक मिलता है:

1. पुरुषोत्तम व्रत

अधिक मास के पूरे माह या कम से कम पूजा वाले दिन पुरुषोत्तम व्रत रखें। एक समय भोजन करें, ब्रह्मचर्य का पालन करें।

2. विष्णु सहस्रनाम

प्रत्येक दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इससे राहु-केतु की पीड़ा में विशेष राहत मिलती है।

3. शिव चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र

नित्य प्रातः और सायंकाल शिव चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।

4. नाग पंचमी पर विशेष पूजा

यदि अधिक मास में नाग पंचमी पड़े, तो उस दिन कालसर्प दोष पूजा अत्यंत फलदायी होती है। नाग मंदिर में दूध, काले तिल चढ़ाएँ।

5. दान और तर्पण

  • काले वस्त्र दान करें
  • काले तिल दान करें
  • जौ/गेहूँ दान करें
  • पितृ तर्पण अवश्य करें
  • नाग कन्या (कुंवारी कन्या) को भोजन कराएँ और वस्त्र दान करें

6. रत्न धारण

पूजा के बाद ज्योतिषी की सलाह से गोमेद (राहु का रत्न) या लहसुनिया (केतु का रत्न) धारण कर सकते हैं। परंतु रत्न केवल अनुभवी ज्योतिषी की सलाह से ही धारण करें।

अधिक मास में कालसर्प दोष पूजा के अद्भुत लाभ क्या है?

लाभ (शीघ्र प्राप्त)

  • मानसिक शांति और चिंता से मुक्ति
  • नींद में सुधार और सपनों में आने वाले भय का नाश
  • शारीरिक रोगों में आराम
  • नौकरी/व्यापार में रुके कार्य बनना

मध्यम कालीन लाभ (कुछ महीनों में)

  • करियर में प्रगति और पदोन्नति
  • व्यापार में वृद्धि और लाभ
  • विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होना
  • संतान प्राप्ति में सफलता
  • शत्रुओं का नाश और मान-सम्मान में वृद्धि

दीर्घ कालीन लाभ (जीवनभर)

  • कुंडली से कालसर्प दोष का स्थायी निवारण
  • भाग्योदय और भाग्य में वृद्धि
  • आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति
  • पितृ कृपा और वंश वृद्धि
  • समस्त ग्रहों की अनुकूलता

विशेष लाभ अधिक मास में

  • अक्षय पुण्य की प्राप्ति
  • पितृ दोष का भी निवारण
  • वंश वृद्धि और संतान सुख
  • मोक्ष की प्राप्ति में सहायता

कालसर्प दोष पूजा से पूर्व और पश्चात की सावधानियाँ

पूजा से पूर्व (नियम)

नियमविवरण
ब्रह्मचर्यपूजा से 3 दिन पूर्व और 3 दिन बाद तक पालन करें
मांसाहारपूर्ण रूप से त्यागें
नशाशराब, सिगरेट, तंबाकू से दूर रहें
सत्य बोलनाझूठ न बोलें, चोरी न करें
स्नानप्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें
भोजनसात्विक आहार ग्रहण करें
चिंतननकारात्मक विचारों से दूर रहें

पूजा के बाद (पालन)

  • पूजा के बाद 11, 21, 41, या 108 दिनों तक राहु-केतु मंत्र का जप करें
  • सोमवार के दिन शिव मंदिर जाएँ
  • शनिवार को हनुमान जी या भैरव जी की पूजा करें
  • नाग पंचमी पर नाग मंदिर अवश्य जाएँ
  • पितृ पक्ष में तर्पण करना न भूलें
  • दान नित्य या साप्ताहिक रूप से करते रहें

यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है, और आप अपने जीवन की बाधाओं से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो आगामी अधिक मास में यह पूजा अवश्य कराएँ। विधिवत, शास्त्रोक्त विधि से की गई यह पूजा आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा कराने के लिए अनुभवी पंडित जी से आज ही नीचे दिये गए नंबर पर कॉल करें।

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