हनुमान अष्टमी 2026: जाने सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और विशेष उपाय

हनुमान अष्टमी क्या है और इसका आध्यात्मिक महत्व?

हनुमान अष्टमी, भगवान श्री हनुमान जी की कृपा और संकटमोचन शक्ति प्राप्त करने का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। यद्यपि अधिकांश भक्त चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाते हैं, परंतु मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि (मध्य भारत एवं मालवा क्षेत्र में पौष कृष्ण अष्टमी) को आने वाली हनुमान अष्टमी का विशेष आध्यात्मिक, ज्योतिषीय और तंत्र-साधना में महत्व है।

वर्ष 2026 में 17 दिसंबर (गुरुवार) को यह पवित्र तिथि मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी की आराधना करने से साधक को भय, मानसिक तनाव, शनि-मंगल दोष और शत्रु बाधा से पूर्ण मुक्ति मिलती है।

हनुमान अष्टमी 2026: तिथि एवं शुभ मुहूर्त (Date & Timings)

विवरणतिथि व समय (2026)
हनुमान अष्टमी तिथि17 दिसंबर 2026, गुरुवार
अष्टमी तिथि प्रारंभ16 दिसंबर 2026, रात्रि 11:20 बजे से
अष्टमी तिथि समाप्त17 दिसंबर 2026, रात्रि 11:45 बजे तक
प्रातःकाल शुभ पूजन मुहूर्तसुबह 06:45 AM से 10:30 AM तक
अभिजीत मुहूर्त (सर्वोत्तम)दोपहर 11:55 AM से 12:40 PM तक
संध्या पूजन (दीपक मुहूर्त)शाम 05:35 PM से 07:15 PM तक

हनुमान अष्टमी और हनुमान जयंती में अंतर

अक्सर भक्त इन दोनों तिथियों को लेकर असमंजस में रहते हैं:

  • हनुमान जयंती: यह चैत्र मास की पूर्णिमा को भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है।
  • हनुमान अष्टमी: यह तिथि हनुमान जी के संकटमोचन और विजय स्वरूप की आराधना का दिन है। विशेष रूप से उज्जैन, इंदौर और मालवा क्षेत्र में इस दिन हनुमान जी को विशेष चोला चढ़ाया जाता है और भव्य ध्वजा यात्राएं निकाली जाती हैं।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • हनुमान जी एवं श्री राम दरबार का चित्र/प्रतिमा
  • चमेली का तेल और शुद्ध नारंगी सिंदूर (चोला हेतु)
  • तुलसी के पत्तों की माला और लाल/भगवा फूल
  • भोग: बेसन के लड्डू, गुड़-चना, और मीठा पान (बीड़ा)
  • सरसों/तिल के तेल का दीपक, धूप, नारियल और लाल त्रिकोण ध्वजा

हनुमान अष्टमी व्रत एवं पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

  1. प्रातःकाल स्नान एवं संकल्प: ब्राह्म मुहूर्त में स्नान कर लाल या पीले वस्त्र धारण करें और हनुमान जी के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  2. प्रतिमा स्थापना: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर श्री राम दरबार के साथ हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करें।
  3. सिंदूर-चोला अर्पण: हनुमान जी को चमेली के तेल में घुला हुआ सिंदूर अर्पित करें और तुलसी पत्रों की माला पहनाएं।
  4. मंत्र एवं सुंदरकांड पाठ:
    • “ॐ हनुमते नमः” या “ॐ रामदूताय नमः” का 108 बार जप करें।
    • इसके बाद हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का सस्वर पाठ करें।
  5. भोग व आरती: बेसन के लड्डू व गुड़-चने का भोग लगाएं। अंत में देसी घी या सरसों के तेल के दीपक से आरती उतारें।

कष्ट निवारण हेतु हनुमान अष्टमी के विशेष उपाय

  • शनि व मंगल दोष शांति: हनुमान जी को चमेली के तेल का चोला चढ़ाएं और 11 पीपल के पत्तों पर ‘राम’ लिखकर माला बनाकर अर्पित करें।
  • भय व शत्रु बाधा निवारण: हनुमान जी के मंदिर में सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाकर 3 बार बजरंग बाण का पाठ करें।
  • कर्ज मुक्ति व व्यापार वृद्धि: हनुमान जी को मीठा पान (बीड़ा) और लाल ध्वजा अर्पित कर सुंदरकांड का पाठ करें।

इस दिन क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • पूरे दिन सात्विक आहार लें और मन में राम नाम का निरंतर स्मरण करें।
  • जरूरतमंदों को भोजन, गुड़-चना या वस्त्र का दान करें।
  • मंदिर जाकर हनुमान जी के सम्मुख दीपक प्रज्वलित करें।

क्या न करें:

  • किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन, मांस, मदिरा या लहसुन-प्याज का सेवन न करें।
  • घर में क्लेश, क्रोध या किसी का अपमान न करें।
  • पूजा के समय काले या गहरे नीले वस्त्र पहनने से बचें।

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