5 मई 2026, मंगलवार को वैशाख कृष्ण चतुर्थी को अंगारक चतुर्थी मनाई जाएगी। जब चतुर्थी तिथि मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारक चतुर्थी कहा जाता है। यह दिन मंगल ग्रह की पूजा के लिए पूरे वर्ष का सबसे शक्तिशाली और फलदायी दिन माना जाता है।
यह अंगारक चतुर्थी इसलिए और विशेष है क्योंकि इस समय मंगल कुंभ राशि में गोचर कर रहा होगा और राहु के साथ अंगारक योग का प्रभाव भी बना रहेगा। ऐसे में मंगल दोष वाले लोगों के लिए यह दिन मंगल पूजा, भात पूजा या हनुमान आराधना का सुनहरा अवसर है।
अंगारक चतुर्थी मंगल पूजा का सबसे बड़ा दिन क्यों है?
अंगारक चतुर्थी मंगल ग्रह को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम दिन है। मंगल ग्रह साहस, ऊर्जा, विवाह और भूमि का कारक है। जब कुंडली में मंगल लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में होता है, तो मंगल दोष बनता है, जिससे विवाह में देरी, दांपत्य कलह, दुर्घटना और स्वास्थ्य समस्याएं आती हैं।
अंगारक चतुर्थी पर मंगल पूजा करने से:
- मंगल दोष का निवारण होता है।
- विवाह बाधाएं दूर होती हैं।
- क्रोध और उग्रता कम होती है।
- साहस और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
- भूमि, वाहन और संपत्ति संबंधी विवाद सुलझते हैं।
अंगारक चतुर्थी का दिन इसलिए ओर अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि मंगल कुंभ राशि में राहु के साथ युति बना रहा होगा, जिससे अंगारक योग बनेगा। ऐसे में मंगल पूजा न केवल व्यक्तिगत मंगल दोष शांत करेगी बल्कि वैश्विक स्तर पर उग्र ऊर्जा को भी संतुलित करने में मदद करेगी।
5 मई 2026 अंगारक चतुर्थी का पंचांग और शुभ मुहूर्त क्या है?
| विवरण | समय (नई दिल्ली के अनुसार) |
|---|---|
| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 4 मई 2026, रात 11:15 बजे |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 5 मई 2026, रात 10:45 बजे |
| मुख्य पूजा दिन | 5 मई 2026 (मंगलवार) |
| मंगल पूजा का सर्वोत्तम समय | सुबह 6:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 11:50 बजे से 12:40 बजे तक |
मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी पर मंगल की पूजा करने से मंगल दोष लगभग 70-80% तक शांत हो जाता है। 2026 में राहु के साथ अंगारक योग बनने से यह दिन मंगल शांति के लिए और भी प्रभावशाली रहेगा।
अंगारक चतुर्थी व्रत कथा
एक बार एक राजकुमार मंगल दोष से पीड़ित था। उसका विवाह बार-बार टूट जाता था और स्वास्थ्य खराब रहता था। एक सिद्ध महात्मा ने उसे अंगारक चतुर्थी व्रत रखने की सलाह दी। राजकुमार ने मंगलवार को मंगल पूजा की, हनुमान चालीसा पढ़ी और व्रत रखा। भगवान मंगल प्रसन्न हुए और दोष शांत हो गया। राजकुमार का विवाह सुखमय हुआ और जीवन में स्थिरता आई।
सीख: अंगारक चतुर्थी पर सच्ची श्रद्धा से मंगल पूजा करने से मंगल की नकारात्मक ऊर्जा सकारात्मक में बदल जाती है।
5 मई 2026 की अंगारक चतुर्थी पूजा विधि क्या है ?
घरेलू पूजा विधि:
- सुबह स्नान कर लाल या केसरिया वस्त्र पहनें।
- हनुमान जी या मंगल यंत्र की पूजा करें।
- लाल फूल, लाल चंदन, गुड़ और चने की दाल चढ़ाएं।
- “ॐ अं अंगारकाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
- हनुमान चालीसा का 11 या 21 बार पाठ करें।
- शाम को आरती करें और प्रसाद बांटें।
मंदिर में पूजा:
- उज्जैन मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा करवाएं।
- नासिक या जयपुर मंगल मंदिर में विशेष पूजा करवाएं।
- मंगलवार को सिंदूर चढ़ाएं और लड्डू का भोग लगाएं।
व्रत नियम: फलाहार या निर्जला व्रत रख सकते हैं। मांसाहार, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
अंगारक चतुर्थी पर किए जाने वाले विशेष उपाय कौन-कौन से है?
- मंगल दोष निवारण: उज्जैन मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा करवाएं।
- विवाह बाधा: 21 मंगलवार व्रत रखें और हनुमान चालीसा पढ़ें।
- क्रोध नियंत्रण: लाल चंदन का तिलक लगाएं।
- धन और साहस: गुड़ और चने की दाल का दान करें।
- हनुमान आराधना: लाल माला से “ॐ हनुमते नमः” का जप करें।
2026 स्पेशल उपाय: अंगारक चतुर्थी पर लाल कपड़े में गुड़ बांधकर हनुमान जी को अर्पित करें। यह उपाय कर्ज मुक्ति और मंगल दोष शांति के लिए बहुत प्रभावी है।
अंगारक चतुर्थी के प्रमुख लाभ कौन-से है?
- मंगल दोष का शीघ्र निवारण।
- विवाह में आने वाली बाधाओं का अंत।
- दांपत्य जीवन में सुख और शांति।
- स्वास्थ्य सुधार (रक्त, पेट और हड्डी संबंधी रोग)।
- करियर में सफलता और नई ऊर्जा।
- साहस और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि।
5 मई अंगारक चतुर्थी को मंगल पूजा का अवसर न चूकें, अभी पूजा बुक करें?
5 मई 2026 की अंगारक चतुर्थी मंगल दोष निवारण, विवाह बाधा मुक्ति और साहस बढ़ाने का सबसे शक्तिशाली दिन है। इस दिन सच्ची श्रद्धा से मंगल पूजा, हनुमान आराधना और व्रत करने से मंगल की उग्र ऊर्जा शांत हो जाती है और जीवन में स्थिरता आती है।
यदि आप भी अपने जीवन में आ रही परेशानियों और वैवाहिक समस्याओं का समाधान चाहते है तो आज ही उज्जैन के अनुभवी पंडित जी से संपर्क करें और अपनी पूजा बुक करें, अभी कॉल करें।