Chhath Puja 2026: नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक तिथि और समय

छठ पूजा सूर्य देव और छठी मइया को समर्पित चार दिनों का महापर्व है, जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। इसमें दूबते और उगते दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। साल 2026 में छठ पूजा की चारों तिथियां और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय नीचे दिया गया है।

Chhath Puja 2026 - घाट पर सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्धालु

Chhath Puja 2026: चारों दिनों की तिथि और समय

दृक् पंचांग (नई दिल्ली) के अनुसार साल 2026 में छठ पूजा का मुख्य दिन रविवार, 15 नवंबर 2026 है। चार दिनों की पूरी सूची इस प्रकार है:

दिनतिथिविधिसूर्योदय / सूर्यास्त
शुक्रवार, 13 नवंबरचतुर्थीनहाय-खाय06:42 AM / 05:28 PM
शनिवार, 14 नवंबरपंचमीलोहंडा और खरना06:43 AM / 05:28 PM
रविवार, 15 नवंबरषष्ठीसंध्या अर्घ्य (दूबते सूर्य को)06:44 AM / 05:28 PM
सोमवार, 16 नवंबरसप्तमीउषा अर्घ्य (उगते सूर्य को) और पारण06:44 AM / 05:27 PM

षष्ठी तिथि 14 नवंबर को रात 11:23 बजे शुरू होकर 16 नवंबर को रात 02:00 बजे समाप्त होगी। शहर के अनुसार सूर्योदय-सूर्यास्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा प्रकृति की उपासना का पर्व है — इसमें किसी मूर्ति की नहीं, बल्कि सीधे सूर्य देव और उनकी ऊर्जा की पूजा होती है। सूर्य को जीवन देने वाला और रोगों को दूर करने वाला देव माना जाता है। छठी मइया को संतान की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है, इसलिए यह व्रत अक्सर माताएं अपने बच्चों की सेहत और लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इस पर्व की खास बात यह है कि वर्ष का यह एकमात्र अवसर है जब दूबते सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है। नदी घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़, सुगंधित प्रसाद और छठ के गीत इसे भारत के सबसे भव्य लोक-पर्वों में से एक बनाते हैं।

छठ पूजा से जुड़ी मान्यताएं

छठ पूजा की परंपरा बहुत प्राचीन मानी जाती है। एक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में कर्ण, जो स्वयं सूर्य देव के पुत्र थे, नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देते थे और यही परंपरा आगे छठ के रूप में चलती आई। एक अन्य मान्यता में द्रौपदी और पांडवों द्वारा भी अपने कष्टों के निवारण के लिए सूर्य उपासना करने का उल्लेख मिलता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी लोग सूर्य की किरणों को ऊर्जा और स्वास्थ्य का स्रोत मानते हैं, इसलिए सूर्योदय और सूर्यास्त के समय की गई उपासना को शरीर और मन दोनों के लिए लाभदायक कहा जाता है। धीरे-धीरे यह पर्व बिहार-पूर्वांचल से निकलकर पूरे देश में और विदेशों में बसे भारतीयों तक फैल चुका है। आज दिल्ली, मुंबई और देश के कई शहरों के नदी-तालाब घाटों पर भी छठ की धूम देखने को मिलती है।

चार दिनों की विधि विस्तार से

पहला दिन — नहाय-खाय (13 नवंबर): व्रती सुबह नदी, तालाब या घर में स्नान करके शुद्ध होते हैं। इस दिन घर की अच्छी तरह सफाई की जाती है। चावल, चना दाल और कद्दू की सब्जी का शुद्ध सात्विक भोजन बनाया जाता है, जिसे पहले प्रसाद के रूप में चढ़ाकर फिर व्रती और परिवार ग्रहण करते हैं।

दूसरा दिन — लोहंडा और खरना (14 नवंबर): इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्जला उपवास रहता है। शाम को गुड़ और चावल की खीर (रसियाव) बनाकर रोटी और फलों के साथ प्रसाद चढ़ाया जाता है। व्रती सूर्यास्त के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं, और इसी प्रसाद के साथ तीसरे दिन का लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।

तीसरा दिन — संध्या अर्घ्य (15 नवंबर): पूरा दिन निर्जला व्रत रहता है। घर में ठेकुआ, चावल के लड्डू और अन्य प्रसाद तैयार होते हैं। शाम को सूप और डौरा (बांस की टोकरी) में प्रसाद, फल, गन्ना, नारियल और दीया सजाकर पूरा परिवार नदी घाट पर जाता है, जहां व्रती पानी में खड़े होकर दूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

चौथा दिन — उषा अर्घ्य और पारण (16 नवंबर): भोर में फिर घाट पर जाकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद प्रसाद सभी में बांटा जाता है और व्रती जल-प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करते हैं।

छठ के गीत और प्रसाद

छठ का पर्व अपने लोकगीतों के बिना अधूरा है। घाट पर और घर में प्रसाद बनाते समय छठी मइया और सूर्य देव के गीत गाए जाते हैं, जो पीढ़ियों से मौखिक परंपरा से चले आ रहे हैं। प्रसाद में ठेकुआ सबसे प्रमुख है, जो गुड़ और गेहूं के आटे से बनता है। इसके अलावा चावल के लड्डू, कसार, नारियल, केला, सिंघाड़ा और गन्ना भी अर्घ्य में जरूर रखे जाते हैं। मान्यता है कि छठ का प्रसाद जितनी शुद्धता से बने, व्रत उतना ही सार्थक होता है।

छठ पूजा सामग्री सूची

सूप और डौरा (बांस की टोकरी), गन्ना, अंगूर, केला, सिंघाड़ा, नारियल, सेब और मौसमी फल, ठेकुआ, गुड़, चावल, गेहूं का आटा, रुई की बत्ती, दीया, अगरबत्ती, केले के पत्ते, हल्दी, अक्षत, फूल, सिंदूर और नई साड़ी या वस्त्र (व्रती के लिए)।

क्या करें और क्या न करें

  • पूरी अवधि में शुद्धता और सात्विकता का पालन करें; घर में प्याज-लहसुन का प्रयोग न करें।
  • प्रसाद बनाने वाले बर्तन अलग और साफ रखें; प्रसाद को पूरी श्रद्धा से तैयार किया जाता है।
  • व्रत के दौरान व्रती जमीन पर सोते हैं और सादगी से रहते हैं।
  • घाट पर भीड़ में सावधानी बरतें और सुरक्षित जगह से ही अर्घ्य दें।
  • पारण से पहले प्रसाद खाना व्रत भंग माना जाता है, इसलिए क्रम का पालन करें।

सूर्य देव से जुड़े अन्य पर्वों की जानकारी के लिए आप हमारा मकर संक्रांति और एकादशी व्रत वाला लेख भी पढ़ सकते हैं।

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घाट की तैयारी और भोर का दृश्य

छठ से कुछ दिन पहले से ही नदी, तालाब और कुंड के घाट साफ करके सजाए जाते हैं। व्रती और उनके परिजन बांस की टोकरी, सूप और नए कपड़ों में प्रसाद सजाकर घाट ले जाते हैं। सूर्यास्त और सूर्योदय के समय घाटों पर जो दृश्य दिखता है, वह अपने आप में अद्भुत होता है: हजारों दीपक, डूबे हुए व्रती और सामूहिक छठ गीतों की गूंज। उषा अर्घ्य के दिन तो व्रती परिवार रात से ही घाट पहुंच जाते हैं ताकि सूर्योदय की पहली किरण निकलते ही अर्घ्य दिया जा सके। अर्घ्य के बाद प्रसाद वितरित किया जाता है और सभी एक-दूसरे को छठ की बधाई देते हैं। यह पर्व सामूहिकता, शुद्धता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का सुंदर उदाहरण माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में छठ पूजा कब है?

छठ पूजा का मुख्य दिन रविवार, 15 नवंबर 2026 है। पर्व की शुरुआत 13 नवंबर को नहाय-खाय से होकर 16 नवंबर को उषा अर्घ्य और पारण के साथ समाप्त होगी।

2026 में खरना किस दिन है?

खरना शनिवार, 14 नवंबर 2026 को है। इस दिन सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर का प्रसाद बनाकर व्रत खोला जाता है।

संध्या अर्घ्य किस समय दिया जाएगा?

संध्या अर्घ्य रविवार, 15 नवंबर 2026 की शाम सूर्यास्त के समय, यानी लगभग 05:28 बजे दूबते सूर्य को दिया जाएगा।

उषा अर्घ्य किस दिन और कितने बजे है?

उषा अर्घ्य सोमवार, 16 नवंबर 2026 को सूर्योदय के समय, लगभग 06:44 बजे उगते सूर्य को दिया जाएगा, इसके बाद पारण होगा।

छठ पूजा में कितने दिन का व्रत होता है?

छठ में कुल चार दिन का क्रम होता है। इनमें खरना के दिन से लेकर उषा अर्घ्य तक लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है।

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